बिजली उत्पादन में आई बड़ी गिरावट
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन इन दिनों निचले स्तर पर पहुंच गया है। सामान्य तौर पर जहां उत्पादन करीब 90 लाख यूनिट तक रहता था, वहीं अब यह घटकर लगभग 70 लाख यूनिट तक रह गया है। इसका मुख्य कारण रामगंगा जल विद्युत परियोजना का बंद होना बताया जा रहा है।
UJVN Ltd. की 198 मेगावाट क्षमता वाली रामगंगा परियोजना पिछले दो दिनों से स्थानीय दुर्घटना के कारण बंद है। इसके चलते राज्य की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ा है और बिजली की उपलब्धता कम हो गई है।
पिछले वर्ष की तुलना में भी कमी
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 12 मार्च को बिजली उत्पादन लगभग 84 लाख यूनिट था, जबकि इस वर्ष इसी तारीख को उत्पादन करीब 71 लाख यूनिट दर्ज किया गया है। सर्दियों में कम बारिश और कम हिमपात के कारण नदियों का जल स्तर भी कम रहा है, जिससे जल विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
नदियों का जल स्तर गिरना भी कम उत्पादन का कारण
| नदी | 2025 | 2026 |
| टोंस(इछाड़ी) | 64 | 46 |
| यमुना(व्यासी) | 29 | 13 |
| यमुना(डाकपत्थर) | 33 | 20 |
| आसन | 15 | 14 |
| भागीरथी(मनेरी) | 27 | 24 |
| भागीरथी(जोशीयाड़ा) | 41 | 29 |
| गंगा (पशुलोक) | 446 | 484 |
| शारदा | 168 | 147 |
(12 मार्च को नदियों का डिस्चार्ज, क्यूमैक्स में)
बिजली की मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर
प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 4.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है, जबकि उपलब्धता करीब 2.1 करोड़ यूनिट ही है। इस कमी को पूरा करने के लिए यूपीसीएल को पावर बैंकिंग और बाजार से बिजली खरीदने का सहारा लेना पड़ रहा है।
इस स्थिति के चलते हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और कई ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती जारी है।
जलस्तर बढ़ने से सुधर सकती है स्थिति
ऊर्जा विभाग के अनुसार, गर्मी बढ़ने के साथ ग्लेशियर पिघलने से नदियों में जल स्तर बढ़ेगा। इससे जल विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग का कहना है कि रामगंगा परियोजना शुरू होते ही उत्पादन 90 लाख से एक करोड़ यूनिट तक पहुंच सकता है।




